दिल्ली-हरिद्वार का सफर होगा आसान, 51 KM नया एक्सप्रेसवे तैयार
hys_adm | November 8, 2026 | 0 | घुम्मकड़ी , देश
हल्द्वानी/देहरादून। दिल्ली से हरिद्वार जाने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिन बड़ी राहत लेकर आ सकते हैं। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से हरिद्वार को जोड़ने वाला 50.7 किलोमीटर लंबा सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे तैयार है। सहारनपुर के हलगोया गांव से शुरू होकर उत्तराखंड के बहादराबाद तक पहुंचने वाला यह नया मार्ग दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल सकता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस परियोजना के शेष निर्माण कार्य, सुरक्षा मानकों और फिनिशिंग को अंतिम रूप देने में जुटा है। हाल में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, इस मार्ग को नवंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में यातायात के लिए खोलने की तैयारी है। हालांकि, कुछ अन्य रिपोर्टों में दिसंबर से वाहनों की आवाजाही शुरू होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में अंतिम तारीख की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। इस मार्ग के शुरू होने से दिल्ली से हरिद्वार की दूरी करीब 190 किलोमीटर रह जाएगी। अभी अलग-अलग पुराने मार्गों से यह दूरी लगभग 215 से 230 किलोमीटर पड़ती है। ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार चार से पांच घंटे तक का समय लग जाता है। नया मार्ग शुरू होने के बाद यात्रा लगभग दो से ढाई घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। कुछ रिपोर्टों में 90 मिनट का अनुमान भी दिया गया है, हालांकि वास्तविक समय शुरुआती स्थान, ट्रैफिक और यात्रा की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की निकलेगी हरिद्वार ब्रांच
इस परियोजना को समझने के लिए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का रूट समझना जरूरी है। दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होने वाला करीब 210 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाता है। इसी कॉरिडोर पर सहारनपुर बाईपास के निकट हलगोया गांव से हरिद्वार के लिए एक अलग लिंक मार्ग निकाला जा रहा है। तकनीकी रूप से इसे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का ‘स्पर-टू-हरिद्वार’ कहा जाता है।
दिल्ली से करीब 140 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद हलगोया में यह इंटरचेंज मिलेगा। यहां से वाहन हरिद्वार की तरफ जाने वाले नए सिक्स लेन मार्ग पर मुड़ सकेंगे। इस स्पर की कुल लंबाई 50.7 किलोमीटर है। यह सहारनपुर के हलगोया मुस्तहकम से शुरू होकर नागल, शीतलाखेड़ा, पहाड़पुर, खेड़ामुगल और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरते हुए उत्तराखंड में प्रवेश करेगा। आगे सलीयर, मेहवड़ कलां, रहमतपुर और बढ़ेड़ी राजपूताना होते हुए बहादराबाद के निकट मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ेगा। इस तरह दिल्ली से आने वाले वाहनों को हरिद्वार पहुंचने के लिए मेरठ-मुजफ्फरनगर-रुड़की के पुराने व्यस्त मार्ग पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
51 किलोमीटर में क्या-क्या है खास?
यह पूरा मार्ग छह लेन का एक्सेस कंट्रोल हाईवे है। इसका अर्थ है कि वाहन निर्धारित इंटरचेंज से ही हाईवे पर प्रवेश कर सकेंगे और बाहर निकल सकेंगे। बीच में कहीं से भी वाहन चढ़ाने या उतारने की अनुमति नहीं होगी।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- कुल लंबाई: 50.7 किलोमीटर
- सड़क: छह लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे
- प्रवेश और निकासी: निर्धारित इंटरचेंज
- प्रमुख पुल: छह
- फ्लाईओवर: छह
- रेलवे ओवरब्रिज: दो
- बढ़ेड़ी राजपूताना में: करीब 870 मीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन
- निर्माण लागत: करीब 1,475 करोड़ रुपये
- कुल परियोजना लागत: करीब 2,156 करोड़ रुपये
निर्माण में छह प्रमुख पुलों के अलावा कई छोटे पुल, बॉक्स कल्वर्ट, पाइप कल्वर्ट और रैंप भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल वाहनों की रफ्तार बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय सड़कों और गांवों की आवाजाही को प्रभावित किए बिना लंबी दूरी के यातायात को अलग रखना भी है।
हलगोया से हरिद्वार तक कैसा होगा पूरा रूट?
इस नए हाईवे की शुरुआत हलगोया में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के ट्रंपेट इंटरचेंज से होगी। यहां तैयार रैंप से वाहन हरिद्वार स्पर पर प्रवेश करेंगे। इसके बाद हाईवे हिंडन नदी को पार करते हुए आगे बढ़ता है। नदी पर मीडियम गर्डर ब्रिज बनाया गया है। इस हिस्से में रोड मार्किंग, लाइटिंग और ट्रैफिक साइन बोर्ड जैसे काम किए गए हैं। आगे शीतलाखेड़ा और आसपास के गांवों के लिए अंडरपास बनाए गए हैं। बजाज हिंदुस्तान शुगर मिल के आसपास भी स्थानीय आवागमन के लिए अलग व्यवस्था की गई है। इस ग्रीनफील्ड सेक्शन की एक खास बात यह है कि गांवों की सड़कों और खेतों तक पहुंचने वाले रास्तों को बंद नहीं किया गया है। जरूरत के अनुसार व्हीकुलर अंडरपास (VUP), लाइट व्हीकुलर अंडरपास (LVUP) और बॉक्स कल्वर्ट बनाए गए हैं। पूरे सेक्शन में 10 व्हीकुलर अंडरपास और 12 लाइट व्हीकुलर अंडरपास का उल्लेख परियोजना की ग्राउंड रिपोर्ट में किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों का स्थानीय ट्रैफिक एक्सप्रेसवे के मुख्य यातायात को प्रभावित किए बिना गुजर सकेगा।
नागल में पहला प्रमुख इंटरचेंज, रेलवे ओवरब्रिज भी तैयार
हाईवे पर आगे नागल के निकट पहला प्रमुख इंटरचेंज आता है। यहां मेरठ-सहारनपुर रेलवे लाइन के ऊपर रेलवे ओवरब्रिज बनाया गया है। इसके साथ ही स्टेट हाईवे-59 यानी सहारनपुर-मुजफ्फरनगर मार्ग के ऊपर से भी एक्सप्रेसवे गुजरता है। रेलवे लाइन इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण रेल कनेक्टिविटी का हिस्सा है। इस व्यस्त रेल मार्ग के ऊपर ओवरब्रिज बनने से सड़क यातायात को रेलवे क्रॉसिंग पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। यहां निर्माण के दौरान और वर्तमान स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। रेलवे ओवरब्रिज और फ्लाईओवर के निर्माण से इस पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। NHAI की योजना के अनुसार उत्तर प्रदेश के नागल में करीब आठवें किलोमीटर पर वाहन हाईवे पर चढ़ और उतर सकेंगे।
रुड़की का बदलेगा रोड इंफ्रास्ट्रक्चर, शहर के बाहर से गुजरेगा ट्रैफिक
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रुड़की और उसके आसपास का नया कनेक्टिविटी नेटवर्क है। अभी दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से हरिद्वार जाने वाले वाहनों को रुड़की क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। इस दौरान स्थानीय वाहनों, औद्योगिक गतिविधियों और लंबी दूरी के यातायात के कारण कई जगह दबाव बना रहता है। नया हाईवे रुड़की शहर को बाईपास करते हुए आगे बढ़ेगा। इससे लंबी दूरी के वाहन शहर के अंदर प्रवेश किए बिना हरिद्वार की ओर जा सकेंगे। इस मार्ग पर कोर कॉलेज रोड और पिरान कलियर क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण है। पिरान कलियर-कोर कॉलेज रोड के पास अंडरपास की व्यवस्था की गई है। आगे रहमतपुर और रतमऊ नदी के आसपास निर्माण कार्य किए गए हैं। यहां से आगे बढ़ने पर बढ़ेड़ी राजपूताना का क्षेत्र आता है, जहां इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण एलिवेटेड सेक्शन बनाया जा रहा है।
बढ़ेड़ी में 870 मीटर लंबा एलिवेटेड रोड
बढ़ेड़ी राजपूताना इस पूरे प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण जंक्शन बनकर उभर रहा है। यहां करीब 870 मीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाया गया है। मौजूदा एनएच-334 पर चलने वाला ट्रैफिक और नए एक्सप्रेसवे का यातायात यहां एक महत्वपूर्ण कनेक्शन से जुड़ेगा। एलिवेटेड सेक्शन के नीचे और आसपास सर्विस रोड की भी व्यवस्था की जा रही है। क्रिस्टल वर्ल्ड और पतंजलि योगपीठ जैसे प्रमुख स्थलों के आसपास से गुजरने वाला यह मार्ग आगे बहादराबाद की तरफ बढ़ता है। यहां पुराने फोरलेन हाईवे को सिक्स लेन एलिवेटेड सेक्शन के रूप में विकसित करने के साथ सर्विस रोड की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। इससे स्थानीय और लंबी दूरी के यातायात को अलग-अलग संचालित करने में मदद मिलेगी।
बहादराबाद में खत्म होगा नया एक्सप्रेसवे
इस लिंक हाईवे का अंतिम हिस्सा बहादराबाद में है। यहां बहादराबाद टोल प्लाजा के निकट यह मार्ग मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ जाएगा। यहीं से वाहन हरिद्वार की ओर आगे बढ़ सकेंगे। हरिद्वार बाईपास और रिंग रोड के साथ बेहतर कनेक्टिविटी मिलने पर ऋषिकेश और आगे चारधाम यात्रा के लिए भी आवाजाही सुविधाजनक हो सकती है। उत्तराखंड के सलीयर में करीब 32वें किलोमीटर पर दूसरा प्रमुख प्रवेश और निकासी प्वाइंट निर्धारित किया गया है। इस तरह पूरे 51 किलोमीटर के मार्ग पर उत्तर प्रदेश के नागल और उत्तराखंड के सलीयर से ही निर्धारित इंटरचेंज के माध्यम से प्रवेश और निकासी की सुविधा मिलेगी।
कांवड़ यात्रा के दौरान मिलेगी बड़ी राहत
दिल्ली-हरिद्वार एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा कांवड़ यात्रा के दौरान देखने को मिल सकता है। सावन में कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से दिल्ली के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था बदलनी पड़ती है। कई दिनों तक हाईवे पर सामान्य वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित या डायवर्ट रहती है। इस दौरान बस, ट्रक और दूसरे वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जाता है। नया एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद दिल्ली से हरिद्वार के बीच एक अतिरिक्त एक्सेस कंट्रोल मार्ग उपलब्ध होगा। इससे सामान्य यातायात को कांवड़ यात्रा के पारंपरिक मार्ग से अलग रखने में मदद मिल सकती है। इसका लाभ केवल कांवड़ यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। स्नान पर्व, चारधाम यात्रा, पर्यटन सीजन और हरिद्वार में आयोजित होने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भी यातायात प्रबंधन आसान हो सकता है।
अर्धकुंभ-2027 के लिए भी महत्वपूर्ण परियोजना
हरिद्वार में वर्ष 2027 में अर्धकुंभ प्रस्तावित है। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह नया मार्ग महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। हरिद्वार पहुंचने के लिए वाहनों को रुड़की और आसपास के व्यस्त शहरी इलाकों में जाने की जरूरत कम होगी। इससे मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव घटाने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब हरिद्वार शहर के भीतर की सड़क व्यवस्था, पार्किंग, बाईपास और रिंग रोड परियोजनाएं भी समय पर पूरी हों।
उद्योग और कारोबार को भी मिलेगा फायदा
हरिद्वार केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं है। यह उत्तराखंड का महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र भी है। बीएचईएल और सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित हैं। यहां ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और एफएमसीजी सेक्टर की इकाइयां काम कर रही हैं। इन उद्योगों से जुड़े कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए सड़क कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण है। नए हाईवे से दिल्ली-एनसीआर, सहारनपुर और हरिद्वार के बीच मालवाहक वाहनों की आवाजाही सुगम हो सकती है। इससे परिवहन समय और परिचालन लागत कम होने की संभावना है। रुड़की, भगवानपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। पर्यटन, होटल, परिवहन और स्थानीय व्यापार से जुड़े कारोबारियों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
परियोजना की चुनौतियां और कुछ अहम सवाल
किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का मूल्यांकन केवल उसकी लंबाई, लागत और निर्माण की गति से नहीं किया जाना चाहिए। उसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को भी देखना जरूरी है। यह परियोजना बड़े पैमाने पर कृषि भूमि से होकर गुजर रही है। ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, करीब 280 हेक्टेयर कृषि भूमि इस परियोजना की जद में आई है और 67 भवन स्वामी प्रभावित हुए हैं। इस क्षेत्र में गन्ना, गेहूं और सब्जियों की खेती प्रमुखता से होती है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से जहां आवागमन आसान होगा, वहीं खेतों का रकबा कम होने और ग्रामीण क्षेत्र में भविष्य में तेजी से शहरीकरण बढ़ने की आशंका भी है। एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज के आसपास जमीनों पर प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव आने की संभावना है। इसके अलावा यह क्षेत्र भूकंपीय जोन-4 में आता है। ऐसे में पुलों, फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोड जैसे बड़े स्ट्रक्चर की सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए सड़क के किनारे और डिवाइडर पर पौधरोपण की योजना भी महत्वपूर्ण होगी। इन पौधों का वास्तविक रखरखाव और विकास सुनिश्चित करना जरूरी है।
हरिद्वार में बढ़ सकता है ट्रैफिक का दबाव
इस परियोजना से हरिद्वार पहुंचना तो आसान होगा, लेकिन इसके साथ एक नई चुनौती भी सामने आएगी। यदि बड़ी संख्या में वाहन कम समय में हरिद्वार पहुंचते हैं तो शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में पार्किंग, आंतरिक सड़कों, हरिद्वार बाईपास और रिंग रोड का समय पर तैयार होना जरूरी है। केवल शहर तक पहुंचने की दूरी और समय कम कर देना पर्याप्त नहीं होगा। शहर के भीतर वाहनों की आवाजाही और पार्किंग का बेहतर प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है।
नवंबर के अंतिम सप्ताह में खुलने की तैयारी, आधिकारिक तारीख का इंतजार
NHAI के स्तर पर इस परियोजना के शेष निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। नवंबर के अंतिम सप्ताह में हाईवे खोलने की तैयारी संबंधी रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं। वहीं कुछ अन्य हालिया रिपोर्टों में दिसंबर से यातायात शुरू होने का लक्ष्य बताया गया है। इसलिए अंतिम समयसीमा को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। कुल मिलाकर दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का यह हरिद्वार स्पर केवल एक नया सड़क मार्ग नहीं है। यह दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार, ऋषिकेश और उत्तराखंड के पर्यटन एवं औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच को बेहतर बनाने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यदि यह तय समय पर शुरू होता है और इसके साथ हरिद्वार की आंतरिक सड़क परियोजनाएं भी पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की सड़क कनेक्टिविटी को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।